Munir Niazi’s Nazm in English/Roman Script can be read at
http://indscribe.blogspot.com/2006/08/munir-niazis-nazm.html
बिछड़ गए तो फिर भी मिलेंगे हम दोनों एक बार
या इस बसती दुनिया में या इसकी हदों से पार
लेकिन ग़म है तो बस इतना जब हम वहां मिलेंगे
एक दूसरे को हम कैसे तब पह्चान सकेंगे
यही सोचते अपनी जगह पर चुप चुप खड़े रहेंगे
इससे पहले भी हम दोनों कहीं ज़रूर मिले थे
यह पहचान के नए शगूफ़े पहले कहां खिले थे
या इस बसती दुनिया में या इसकी हदों से पार
बिछड़ गए हैं मिल कर दोनों पहले भी एक बार
(मुनीर नियाज़ी)
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